हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


हमारे देश में नेताओं का ऐक वर्ग ऐसा है जिन के माथे पर on sale का स्टिकर सदा लगा रहता है। जिस पार्टी को सरकार बनाने के लिये इन की जरूरत पडे वह इन्हें मोल-भाव कर के खरीद सकता है। यह लोग अपनी पार्टी के Supremo कहलाते हैं। उन के सामने किसी अन्य वर्कर की कोई औकात नहीं होती। लालू यादव, रामविलास पासवान, अजीत सिहँ और शिबूसौरेन आदि इस वर्ग के जाने पहचाने नाम हैं।

दूसरा वर्ग उन लोगों का है जो Toggle switch की तरह जोडियों में काम करते हैं। अगर ऐक वर्ग पक्ष में होगा तो दूसरा विपक्ष में। मायावती – मुलायम, जयललिता – करुणानिधि, ऊधव ठाकरे – राज ठाकरे, फारुख अबदुल्ला – मुफ्ती मुहम्मद सैय्यद आदि इसी ‘प्रतिक्रियावादी’ श्रेणी के हैं।

तीसरा वर्ग उन Hard Bargainer स्वार्थियोंका है जो काफी मोल भाव कर के बिकते हैं, मगर उन के समर्थन वचनों के बाद भी उन पर विशवास नहीं किया जा सकत। चन्द्रबाबू नायडू, ओम प्रकाश चौटाला, ममता बनर्जी, शरदपवार और नवीन पटनायक आदि इन में प्रमुख हैं। उन का निजी स्वार्थ ही सर्वोपरि रहता है।

अब जरा सोचिये – जो पार्टियां या नेता 100 से भी कम प्रत्याशियों के साथ चुनाव लडते हैं उन की देश के लिये क्षमता क्या हो सकती है? इस तरह के ‘खुदरा नेता’ और पार्टियां जितना तोल मोल करें गे उस से किसी का क्या भला करें गे? किसी जाति, धर्म, व्यवसाय, या छोटे मोटे गुट के नाम पर चुनाव लडने वाले, निर्दलीय, पुराने वक्त के 75-80 वर्ष के थके हारे नेता केवल अपना और अपने परिवारों का भला करने के लिये ही चुनाव लडते हैं क्योंकि सिर्फ चुनाव जीतने पर ही 75 – 80 वर्ष की आयु में ऐक लाख रुपये की मासिक आय, मुफ्त इलाज, देश भर का हवाई-जहाज में भ्रमण और अनेक तरह की ढेर सारी अन्य सुविधायें उन्हें अगले पाँच वर्षों लिये सहज में ही प्राप्त हो जाती हैं।

क्या ऐसे लोगों को वोट देने से देश का या आप का कुछ भला होगा? – बिलकुल नहीं !फिर ऐसी पार्टियों और निर्दलीय लोगों के लिये अपना वोट खराब करना मूर्खता नहीं तो और क्या है? आप को चकमा दे कर नेता फायदा उठा जाता है और फिर पाँच वर्ष तक वही नेता आप को दिखाई भी नहीं पडता। आ बैल मुझे मार इसी को कहते हैं!

2014 में ही अपना बोझ थोडा तो कम कीजिये – लालू यादव, मुलायम सिहं, मायावती, अजीत सिहं, केजरीवाल, देवेगोडा, अमर सिहँ, आडवाणी और ढेर सारी दक्षिण भारत की पार्टियों के नेताओं को राजनीति से रिटायर कीजिये और भारत को साफ रखने में अपनी मदद स्वयं कीजिये। इन लोगों ने भारतीय लोकतन्त्र को ऐक मजाक बना कर रख दिया है और यही नेता देश की प्रगति के मार्ग में सब से बडी रुकावट हैं। इस ‘नेतावी दीमक’ को को अगले चुनाव में सत्ता से बाहर करना ऐक महान देश सेवा होगी।

चाँद शर्मा

 

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