हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


अफजल अपने धर्म की खातिर पर शहीद हो गया और उस के धर्म भाई और मुरीद अपने शहीद का सम्मान कर रहै है। हिन्दू तो उन से भी गये गुजरे हैं। 14 फरवरी को हमारे देश में भगत सिहँ, राजगुरू और सुखदेव को भी तो शहादत सुनाई गयी थी। परन्तु आज कल हम इस दिन को वेलेन्टाईन डे कह कर मनाते हैं।

अफजल और उस के समर्थकों को गालियाँ देने से क्या होगा? आप का अपना खून थोडी ही देर में ठंडा हो कर फिर से जमना शुरु हो जाये गा। गुस्सा वह होता है जो चाण्क्य ने किया था, शिवा जी ने, गुरु गोबिन्द सिहँ ने, भगत सिहँ, राजगुरू और सुखदेव ने किया था। उन्हों ने किसी को गालियाँ नहीं दीं थी। गोडसे ने भी किया था लेकिन हम उसे ‘हत्यारा’ कहते हैं

हिन्दूओ- शर्म के साथ साथ थोडा आत्म चिन्तन कर के देखो। पाकिस्तानी सरकार के इशारों पर जिहादी हमारे विमान अपहरण कर के ले जाते हैं, हमारे घर में घुस कर हमें मार डालते हैं, ब्लास्ट करते हैं – हमारे जवान का हमारे देश की घरती पर ही सिर काट कर ले जाते हैं। और हम कैण्डल मार्च निकालते हैं। जवानों के घर वालों को कुछ लाख रुपये दे कर भूल जाने को कहते हैं। फिर से आईटम सांग देखने लग जाते हैं।

हमारे ‘नेता’  सबूतों के गठ्ठर पीठ पर लाद कर दुनियाँ भर को दिखाते हैं – अमरीका के आगे अपने देश को गिरवी रख कर औबामा जी से समर्थन मांगते हैं और बदले में उन से क्या पाते हैं? दस वर्षों में क्या पाया? FDI?

80 लाख से भी ज्यादा नौजवानों के इस देश में क्या हम, और हमारी सरकार, ऐक भी अफजल या कसाब नहीं पैदा कर सकी? हमारे कमाँडो और पुलिस के जवान सिर्फ नेताओं को सुरक्षा और सलामी देने के काम आते हैं या फिर अपने देश वासियों पर लाठियाँ बरसाने में इस्तेमाल होते हैं। हम स्वामी रामदेव जैसे देश भक्तों को फाँसी पर लटकाने की धमकियाँ देते हैं मगर अफजल और कसाब जैसे आतंकियों को सुबह के उजाले में कानून के अनुसार सजा देने की हिम्मत भी नहीं रखते। अहिंसा का कैंसर हिन्दुस्तान को पूरी तरह से ग्रस्त कर चुका है। अल्प संख्यकों का इस देश पर प्रथम हक है इस लिये यह देश भी अब उन्हीं का है। कोई शक हो तो प्रधान मन्त्री से या किसी भी काँग्रेसी से पूछ कर देख लो।

हिन्दू युवाओं ने अपने वीर पूर्वजों को भुला कर फिल्मी सितारों, क्रिकेटरों, गजल गायकों, नाचने वालियों, और भांडो को अपना ‘लाईफ आईडल’ बना लिया है। इसलिये अब अपना देश छोड कर विदेशों में जा कर मजदूरी करो, देश में बेरोजगारी भत्ता लो, वैलेन्टाईन डे मनाओ और ऐश करो।

अपने शहीदों का सम्मान करना नहीं जानते तो दूसरों के शहीदों का अपमान भी मत करो। कुछ करना है तो शर्म करो या फिर आत्म चिन्तन करो कि हम वीरों की संतानों से इतने कायर क्यों बन गये।

चाँद शर्मा

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Comments on: "शहीदों के मुरीद" (2)

  1. वाह साहब जी आपने बहुत अच्छी बात कही, आज के दौर में युवा पीढी कहां जा रही है , समझ में नही आ रहा,
    अपने मूल्यों को भूलकर हम नैतिक पतन ही कर रहे हैं। आप के लेख बहुत ही ऊर्जा से भरे होते हैं।
    और बहुतों के लिए मार्गदर्शन का कार्य भी करते है। हमें भी आप पर गर्व है, आप जैसे लोग ही एक स्वस्थ समाज के निर्माण की नीव का मार्ग बनाएगें । क्या हम आपके विचारों को “सोशल मीडिया” के माध्यम से शेयर कर सकते हैं ..??

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