हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


आसाराम के भक्तों के लिये संत आसाराम भगवान की तरह हैं जैसे कांग्रेसियों, कम्यूनिस्टों और धर्मान्तरण करने वालों के लिये वह ऐक शैतान हैं। दोनों विचारधारायें बहस का विषय हो सकती हैं मगर इस में कोई शक नहीं रहना चाहिये कि आसाराम ऐक हिन्दू इनसान हैं और उन में ऐक इनसान की अच्छाईयां और बुराईयां शामिल हैं। वह हिन्दूओं को भारत में विदेशी पम्परायें त्याग कर हिन्दू आस्थाओं के साथ जीने को कहते हैं तो इस में बुरा क्या है? जो आरोप उन पर लगे हैं वह अब कानून का विषय हैं और उन का उत्तर कानूनी तरीके से ही दिया जा सकता है मगर जिस तरह से मीडिया उन पर कीचड उछाल रहा है इस के अधिकार मीडिया को किस ने दिया है? मीडिया के आलेख खबर नहीं सुना रहै वह सोचे समझे तरीकों से दुषप्रचार कर के हिन्दू आस्थाओं के प्रति भ्रान्ति फैला रहै हैं।

प्रश्न इस समय व्यक्तिगत नैतिकताओं और आस्थाओं का नहीं बल्कि भारत में हिन्दूओं की राजनैतिक पहचान का है जिस को ‘सैकूलर और स्वार्थी किस्म के राजनेताओं’, बिकाऊ मीडिया चैनलों, जिहादियों, धर्मान्त्रण कराने वालों और विदेशी कम्पनियों ने खतरें में डाल दिया है। इस लिये हिन्दूओं को यह कहने में तनिक भी झिझक नहीं होनी चाहिये कि उन विदेशी हिन्दू विरोधियों की तुलना में हमारा अपना हिन्दू संत ‘जो और जैसा भी है’ आदरणीय है। उस ने अगर कोई अपराध किया है तो उस की सजा उसे कानून देगा। क्या यह लोग अब जागे हैं कि आसाराम ने कई जगहों पर अतिकर्मण कर रखे हैं। पहले क्यों सो रहै थे? अपने आस पास देखें गे तो आप को हर नगर में राजनेताओं, मन्दिरों, मस्जिदों, गिरजा घरों, मजारों, और भूमाफियाओं के अतिकर्मण दिखाई दे जायें गे। आसाराम का केस अकेला नहीं है।

साधू संतों पर लांछन लगना भी कोई नई बात नहीं है। यौन उत्पीडन के आरोप इन्द्र देवता और ऋषि विश्वमित्र पर भी लगे थे, हिलण्यकशिपु और कंस आदि ने साधू संतों का परिताडण भी किया था और बर्बाद भी हो गये थे। कुछ समय पहले यही हिन्दू विरोधी गुट निर्मल बाबा पर भी आरोप लगा कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रचार कर रहै थे और अब झक मार कर बैठ गये हैं। स्वामी रामदेव को भी बदनाम करने के कांग्रेसी – कम्यूनिस्ट  मनसूबे बनते रहते हैं। भले ही कुछ बिकाऊ और सरकारी किस्म के संत मौके का लाभ उठाने की फिराक में भी रहते हैं परन्तु संतसमाज को ऐकजुट रहना चाहिये। आसाराम के Followers को भी निराश होने या अपना संयम खो बैठने की जरूरत नहीं। अगर उन की आस्था अपने गुरू में है तो अब अपने मन में यह दृढ़ निश्चय कर नें कि  आने वाले चुनाव में वह उस सरकार को सत्ता से उखाड फैंकें गे जिस ने उन के गुरू को अपमानित किया है।

जिन  राजनेताओं, पत्रकारों, और व्यक्तियों को संत आसाराम पर आस्था नहीं उन के लिये भी यह जरूरी है कि कम से कम वह देश के कानून में ही आस्था रखें और  अपना गैर कानूनी बकवासी किस्म का प्रचार बन्द करें जब तक कोर्ट संत आसाराम को आरोपी नहीं घोषित कर दे।

चाँद शर्मा

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Comments on: "भगवान, शैतान या इनसान संत आसाराम" (1)

  1. ashok gupta said:

    माफ़ करना , इतने बड़े ब्रह्म ज्ञान वाला धर्म ने नपुंसक अज्ञानी व् अश्रधा वाले लोगों को जन्म दिया है

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