हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


बच्चे पैदा करना, खाना, पीना, सुरक्षित और आराम से रहना – यह सभी काम जानवर भी करते हैं। इन सब ‘सहूलतों’ को हम ‘विकास’ या ‘सुशासन’ भी कह सकते हैं। इन के अतिरिक्त मानवों को जो बातें जानवरों से अलग करती है वह है अपना ‘सम्मान’ और अपनी ‘पहचान’।

निजि पहचान’ धर्म से होती है जो जन्म से पहले ही माता-पिता की निजि पहचान से जुडा रहता है। धर्म के अनुसार ही मानवों का नाम रखा जाता है जो जीवन पर्यन्त चलता है। रीति रिवाज, खान पान निर्धारित होता है, जीवन की मर्यादायें, कर्तव्य और अधिकार, अच्छे – बुरे का अन्तर विरासत में प्राप्त होता है। धार्मिक पहचान मृत्यु के पश्चात भी अचल रहती है क्यों कि दाह संस्कार और मरणोपरान्त की सभी रस्में अगली पीढियां धर्मानुसार ही निभाती हैं।

‘सम्मान’ नागरिकता के साथ जुडा होता है। सरकार तथा दूसरे नागरिकों की तुलना में किसी को क्या अधिकार या कर्तव्यों का पालन करना है यह नागरिक्ता के साथ जुडा विषय है। किसी अन्य देश की नागरिक्ता प्रप्त होने पर धर्म की पहचान तो वही रहती है परन्तु अधिकार और कर्तव्य नये देश के नियमों के अनुसार बदल जाते हैं।

जहाँ तक हिन्दूओं के सम्मान की बात है तो विभाजन के बाद कांग्रेस और सैकूलर पंथियों ने हमें तीसरे या चौथे दर्जे का नागरिक बना डाला है। हिन्दूओं की तुलना में दूसरे धर्म वालों को  सर्वोच्च अधिकार और सुविधायें प्राप्त हैं। अगर ऐक मुस्लिम दुर्घटना में मर जाये तो मुआवजा 15 से पचास लाख तक मिलता है लेकिन अगर कोई हिन्दू ड्यूटी पर भी मर जाये तो मुआवजा सिर्फ पांच लाख तक सीमित हो जाता है। यह केवल ऐक उदाहरण है। भारत में अब हिन्दूओं की सब से बडी जिम्मेदारी अल्पसंख्यकों को खुश रखने की है।

हिन्दूओं की पहचान के सभी चिन्ह ऐक के बाद ऐक तेजी से मिटाये जा रहै हैं। हिन्दू कानूनों में सरकारी दखलअन्दाजी, मन्दिरों की सम्पति पर सरकारी या अल्प संख्यकों के कबजे, हिन्दू मर्यादाओं का सरकारी बहिष्कार तथा उपहास, हिन्दू साधू-संतों का तिरस्कार आदि इसी के कुछ जवलन्त उदाहरण हैं।

अब देश की हिन्दू जनता को 2014 के चुनाव में फैसला करना है कि ‘विकास’ और ‘सुशासन’ का खोखला धर्म निर्पेक्ष ‘कांग्रेसी जीवन’ जानवरों की तरह से जीना है या सम्मान और अपनी पहचान के अनुसार ‘मानवी हिन्दू जीवन’ जीना है।

अब वक्त है अपने और अपने पूर्वजों के सम्मान और पहचान की खातिर हाथ में मतपत्र लेकर ऐकजुट हो जाओ वर्ना तुम्हारी दास्तां भी ना होगी दास्तानों में।

चाँद शर्मा

Advertisements

Comments on: "सम्मान और पहचान" (4)

  1. कृपया बतायें कौन सी पार्टी हिन्दुओ की है जो बीजेपी की तरह सरकार के लालच में
    हिन्दुओं को धोखा नहीं देगी,

    • हिन्दूओं का भला तभी हो सकता है जब हिन्दू समर्थक पार्टी दो तिहाई बहुमत लेकर सत्ता में आये और हिन्दू विरोधी संवैधानिक प्रावधानों को बदल सके। यह सभी जानते हैं कि इस समय कोई भी पार्टी पूर्णत्या हिन्दू समर्थन नहीं कर सकती लेकिन फिर भी आर ऐस ऐस और विश्व हिन्दू परिषद से सहयोग रखने वाली बी जे पी इस दिश में कुछ ना कुछ सुधार कर सकती है।

  2. Well said !

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

टैग का बादल