हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


जिस ‘पीडिता’ लडकी ने संत आसाराम पर ‘आरोप’ लगाये हैं उस का ऐक बार तो धन्यवाद अवश्य करना चाहिये कि उस ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और केन्द्र सरकारों को गहरी नीन्द से जगा दिया है। आज तक सभी सरकारें सो रही थीं। उन्हें पता ही नहीं था की संत आसाराम ने 425 स्थानों पर अतिकर्मण कर रखा है, उन के आश्रमों में महिलाओं का यौन शोषन होता है, बच्चों की तस्करी भी होती है, नकली दवाईयां बेची जाती हैं, और जादू टोने होते हैं। उन के आश्रमों में अवैध निर्माण भी हैं और पता नहीं क्या क्या और भी हो गा? शायद रसायनिक हथियार भी बनते हों गे और हो सकता है अमेरिकन प्रशासन को भी कोई दखलअन्दाज़ी करनी पडे। इतना ही नहीं संत आसा राम के पुत्र भी घोर अपराधों में लिप्त रहते थे और समस्त हिन्दू समाज को मूर्ख बना रहै थे।

सच इस अकेली पीडिता ने देश के लाखों नहीं बल्कि करोडों हिन्दूओं पर ‘अहसान’ किया है और उन्हें सत्य की चमक दिखलाई है। हमारा ‘सरकारी साधू समाज’ भी अपनी ‘समाधि’ से जाग उठा है और उन्हें संत आसाराम सें अब बुराईयों के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं दे रहा। लेकिन उन्हें यह अवश्य याद रखना चाहिये कि अगर आज आसाराम की बारी है तो कल उन का नम्बर भी अवश्य लगे गा क्यों लोकतंत्र में सरकारें तो आती जाती रहती हैं। हिन्दू शास्त्रों में भी यही विधि का विधान भी है।

काश कुछ और महिलायें भी आगे आयें और हमारे राजनेताओं को आरोपित कर के कुछ सच्चाई उन के बारें में भी बतायें। हमारा प्रजातन्त्र उन का आभारी रहै गा।

अब हमें यह भी सोचना होगा कि भारत में सरकारी महकमें क्या इसी तरह से काम करते हैं। ऐक महिला ने ऐफ आई आर लिखवा दी तो सरकारी तंत्र में, मीडिया में, सरकारी साधु संतों में, और हिन्दू विरोधियों के ढोल बजने शुरू होगये कि उठो ऐक ‘मुजरिम’ पकड लिया गया – उसे पहले काल कोठडी में डाल दो जाँच तो होती रहै गी। शरद यादव तथा गुरदास जैसे हमारे वरिष्ठ आदरणीय सांसद संसद में ही गुहार लगाने लग गये कि बस अब संत आसाराम को फांसी दे दो।हिन्दू विरोध के जोश में उन्हों ने सभी मर्यादायें ताक पर ऱख दीं क्यों इलेकशन के बादल आसमान पर छाने वाले हैं। अफजल और कसाब को फांसी देनें में जिस जोश और तेजी का अभाव था वह अब पूरा होता दिखाई दे रहा है।

जिक्र जब भी ‘भारत निर्माण’ का होगा ‘अहसान’ पीडिता का भी याद किया जाये गा।

चाँद शर्मा

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