हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


चुनावों में दिल्ली की जनता का जनमत स्पष्ट था –

  • 70 में से 62 विधायक काँग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिये चुने गये – लेकिन सत्ता की चाबी आज भी काँग्रेस के पास है।
  • 32 विधायक बी जे पी के और 28 विधायक आप के चुने गये – मतलब यह कि दोनो काँग्रेस विरोधी दिल्ली के शासन को पाँचसाल तक निर्विघन मिल कर चलायें।

लेकिन चुनावों के बाद गिरगिटों ने अपने अपने बहाने बना कर रंग बदलने शूरू कर दिये जो दिल्ली की जनता के साथ धोखा धडी है।

केजरीवाल का स्वांग

केजरीवाल अपने आप को आम, बेनाम और गरीब आदमी दिखाने की नौटंकी में जुट गये हैं। पंचायती तरीकों से गली मौहल्लों की सभायें, मैट्रो रेल में सफर, जमीन पर बैठ कर शपथ गृहण समारोह, सुरक्षा से इनकार, फलैटों मे रहना और ना जाने आगे और क्या कुछ देखने को मिले गा उन्हें आम आदमी का स्थाई मेक-अप नहीं दे पायें गी।

जोश में हो सकता है अब शायद वह अपने घर की बिजली भी कटवा दें और आम आदमी की तरह लालटैन से काम चलायें, पी सी ओ पर जा कर टेलीफोन करें, बाल्टी में पानी भर कर सडक पर लगे सरकारी हैंड पम्प पर खुले में नहायें, और सरकारी जमीनों पर दिल्ली में रोज हजारों की तादाद में आने वालों को पहले झुग्गियां बनाने दें और फिर उन्हें पक्के मालिकाना हक दे कर अपना वोट बैंक कायम करें लें।

लेकिन इन सब नाटकों से दिल्ली की समस्यायें हल नहीं हों गी – और बढती जायें गी। सुशासन के लिये आम आदमी को समय के साथ साथ व्यवहारिक भी होना जरूरी है। दिल्ली की जनता ने उन्हें आम आदमी से विशिष्ट आदमी – मुख्यमंत्री – बनाया है। उन के लिये उचित यही होगा कि वह मुख्य मत्री के दाईत्व को सक्षमता से निभायें। ऐक मुख्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाने के लिये जिन उपकरणों और सुविधाओं की जरूरत अनिवार्य है उन्हे जरूर इस्तेमाल करे ताकि आम आदमी को वास्तविक फायदा हो और उन की समस्यायें सुलझ जायें। सभी को हर समय खुश रखने के प्रयत्न मत करें और जरूरत अनुसार कडे फैसले भी लें। दिल्ली राज्य की सरकार को ग्राम पंचायत की तरह से चलाने का नाटक बन्द करें।

मीडिया

हमारा मीडिया जब तक कारोबारी दृष्टीकोण छोड कर इण्डिया फर्स्ट की भावना को नहीं अपनाता तो उस के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं करी जा सकती। मीडिया अब कोई समाज सेवा का काम नही रहा – पूर्णत्या ऐक व्यापारिक क्षेत्र है जो सिर्फ समाचारो को बेचने के लिये उन्हें सनसनी युक्त करता रहता है।  आजकल मीडिया नयी तरह की राजनीति की मार्किटिंग में जुट गया है। टी वी पर अति संवेदनशील या ससनीखेज़ भाषा में लिखे आख्यान प्रसारित करने मे व्यस्त है। आम आदमी पार्टी के नेताओं की अव्यवहारिक कर्म शैली के आधार पर उन का चरित्र चित्रण, व्यवहारिकता से कोसों दूर यूटोपिया में ले जाने वाले, बासी बुद्धिजीवियों की अनाप शनाप बहस अब रोज मर्रा के प्रोग्रामों की बात बन गयी है। मीडिया पर हंटर चलाना अति आवश्यक हो चुका है।

काँग्रेस

राहुल गाँधी भी भ्रष्ट काँग्रेसियों से दूर अपनी अलग पहचान बनाने जुट गये हैं। उनकी मां के इशारो पर आज तक जो यू पी ऐ सरकार करती रही है वह उसी सरकार के मंत्रियों की कथनियों और करणियों को नकारने मे जुट गये है। आदर्श घोटाले की रिपोर्ट पर दोबारा विचार होगा। लालू को राजनीति मे फिर से बसा लिया जाये गा। संजय दत्त की पैरोल की जाँच भी होगी और… आने वाले दिनों में  भारत मुक्त होने से पहले काँग्रेस को भ्रष्टाचार मुक्त कर दिया जाये गा। काँग्रेस अब ऐक पुराना चुटकला है जिसे सुनना या सुनाना बेकार का काम है।

बी जे पी

खिसियानी बिल्ली की तरह बी जे पी केजरीवाल को अब हाथ में जादुई चिराग़ के साथ आलादीन की भूमिका में देखना चाहती है ताकि या तो दिल्ली वासियों की सभी नयी पुरानी समस्याऐं शपथ ग्रहण के पाँच मिन्ट बाद ही सुलझ जायें या फिर आप पार्टी की सरकार गिर जाये और दिल्ली के लोग बी जे पी की सरकार चुन लें।

बी जे पी यह भूल चुकी है कि दिल्ली में उन की हार का मुख्य कारण भाई भतीजावाद, नेताओं की आपसी लडाई, जनता की अनदेखी और नरेन्द्र मोदी पर ओवर रिलायंस था। बी जे पी के नेता काँग्रेसी तौर तरीके अपनाने में जुट चुके हैं। यही कारण था कि कछुऐ ने खरगोश को चुनावी दौड में पछाड दिया।

अब बी जे पी को केजरीवाल की सरकार गिराने की उतावली के बजाये मध्यप्रदेश, गोवा, राजस्थान, छत्तीस गढ़ और गुजरात में विशिष्ट बहुमत के साथ विशिष्ट सुशासन दिखाना चाहिये। केजरीवाल की अच्छी बातों को अपनानें में शर्म नहीं करनी चाहिये। कम से कम आम आदमी पार्टी के सामने साकारात्मिक विपक्ष ही बन कर रहैं और सरकार गिराने की उतावली छोड दें। उसे अपने आप गिरना होगा तो गिर जाये गी।

स्वार्थवश जब भी काँग्रेस केजरीवाल की सरकार को गिराना चाहै तो ताली बजाने के बजाये बी जे पी को केजरीवाल को गिरने से बचाना चाहिये ताकि केजरीवाल अपने आप को शहीद घोषित ना कर सके और कुछ कर के दिखाये। आलोचना करने के अतिरिक्त सकारात्मिक विपक्ष होने के नाते बी जे पी का यह दाईत्व भी है कि वह केजरीवाल की सरकार को कुछ कर दिखाने के लिये पर्याप्त समय भी दे और उसे काँग्रेस के शोषण से बचाये रखे।

आम आदमी

नेतागण – अब गिरगिट नौटंकी छोड कर साधारण आदमी बने, व्यवहारिक और सकारात्मिक काम करें तभी वह आम आदमियों के नेता बन सकते हैं। नहीं तो आम आदमी की आँधी और आराजिक्ता के रेगिस्तान में पानी ढूंडते ढूंडते प्यासे ही मर जायें गे। बदलाव की लहर को रोकना मूर्खता होगी लेकिन गिरगटी बदलाव से बचें।

 

चाँद शर्मा

 

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