हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


दिल्ली में ‘AAP’ की सरकार है जिन्हों ने जनता के सामने बहुत बड़े बड़े वादे किये थे –

  • क्या सरकार के मंत्री छोटे बंगलों में रहने का दिखावा करने से ही आम आदमियों की समस्यायें सुलझ जायें गी?
  • क्या सरकार के मंत्री सुरक्षा नहीं लें गे तो आप का निजि सुरक्षा अपने आप बढ़ जाये गी? क्या अब दिल्ली में रेप मर्डर आदि होने बन्द हो गये हैं?
  • क्या दिल्ली में 500 नये स्कूल खुल गये हैं?
  • क्या दिल्ली के झुग्गी वालों को पक्के मकान मिल गये हैं? वहाँ पर बिजली पानी पहुँच गया है? क्या दिल्ली में अब नयी झुग्गियाँ नहीं बने गी?
  • क्या दिल्ली में बिजली की दरें आधी हो गयी हैं?
  • क्या दिल्ली में प्रत्येक घर को 700 लिटर मुफ्त पानी प्रतिदिन मिल रहा है?
  • क्या दिल्ली के मंत्रियों के जनता दरबारों में जनता की फरियाद पर समाधान मिल रहा है? फरियादों के आँकडे तो हैं समाधान के आँकडे कहाँ हैं ?
  • क्या दिल्ली भ्रष्टाचार मुक्त हो गयी है?
  • क्या ‘AAP’ की सरकार काँग्रेस और बी जे पी को समान दूरी पर रख रही है?
  • क्या अन्य देशों में प्रजातान्त्रिक सरकारें स्टिंग आप्रेशनों से चलती हैं?

नहीं इन में से कुछ भी तो नहीं हुआ !

राष्ट्रीय समस्याओं को सुलझाने के विषय में इस छोकरा गुट के पास कोई सोच, विचारधारा, दृष्टीकोण, संगठन, अनुभव या योग्यता आदि कुछ भी तो नही ! दिशाहीन भीड़ सरकार नहीं चला सकती। ऐक भेड के पीछे चलती हुयी सभी भेडें कुयें में जा गिरती हैं।

अगर किसी बन्दर को किसी विशाल मशीन पर बैठा दिया जाय तो जैसे वह मशीन के कल पुरज़ों के साथ छेड छाड कर के देखता है उसी तरह सिर्फ कुछ अनुभव हीन छोकरों का ऐक गुट सरकारी सत्ता के गलियारों पर जम गया है और उल्टे सीधे तरीकों से प्रशासन को टटोल रहा है – शायद कुछ चल पडें।

क्या हम देश की प्रगति को रोक कर उसे अस्थिरता और आराजिक्ता की तरफ मोडने का जोखिम उठा सकते हैं।

अगर नहीं तो देश को इस वक्त स्शक्त नेतृत्व और स्थिर राष्ट्रवादी सरकार की आवश्यक्ता है जो आज केवल नरेन्द्र मोदी ही दे सकते हैं। उन्हें बार बार परखा जा चुका है।

राष्ट्रवादी, भारतीय संस्कृति से जुडी हुयी तथा परिवार क्षेत्रवाद और मार्क्सवाद से दूर केवल भारतीय जनता पार्टी ही देश को ऐकता और सुरक्षा दे सकती है। भारत स्वाभिमान और स्वदेशी गौरव को पुनर्स्थापित कर सकती है। जिस को विशवास ना हो वह गुजरात, मध्यप्रदेश, गोवा, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जा कर देख ले।

अब अस्थिरता, अनुभवहीनता या छोकरा मस्ती करने का समय नहीं है। ‘AAP’ की असलीयत देखी जा चुकी है। इस के पीछे छुपे हुये चेहरे भी ऐक के बाद ऐक सामने आ रहै हैं।

चाँद शर्मा

Advertisements

Comments on: "भेड़-चाल" (2)

  1. पर फिर भी छः महीने तो परखना ही चाहिये…

  2. माचिस की हर तीली को जला कर परखने की ज़रूरत नहीं होती – क्या ऐक बीमार आदमी इन्तिज़ार कर सकता है कि कोई अनाड़ी डाक्टर उस का इलाज ‘ट्रायल और ऐरर’ से करता रहै ? पूर्णिमा जी – छः महीने में तो रोगी मर जाये गा।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

टैग का बादल