हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


26 मई 2014 को सभी राष्ट्रवादियों के सपने साकार हो गये हैं क्यों कि आज विदेशी शासन के साथ साथ स्वतंत्र भारत से नेहरू युग का अन्त भी हो गया है। चुनावों में काँग्रेस पार्टी के विनाश तथा परिवार वाद की राजनीति का भी विनाश हो चुका है। देश में सम्पूर्ण बहुमत के साथ भारत की अपनी सरकार है जिस का आधार भारतीय संस्कृति पर स्थिर है।

27 मई 1964 को उस जवाहरलाल नेहरू का देहान्त हुआ था जो स्वयं अपने बारे में कहा करते थे कि ‘मैं विचारों से अंग्रेज़, रहन-सहन से मुसलिम और आकस्माक दु्र्घना से ही हिन्दू हूं’। 27 मई का महत्व इस लिये ऐतिहासिक है कि इसी दिन को नरेन्द्र मोदी की राष्ट्रीय सरकार का प्रथम कार्य दिवस है। नरेन्द्र मोदी अपने आप को गर्व से राष्ट्रवादी हिन्दू कहते हैं – यही फर्क नेतृत्व में आया है और प्रत्येक भारतवासी में आये गा।

बटवारे के तुरन्त बाद ही भारत को पुनः खण्डित करने की प्रतिक्रिया नेहरू जी ने अपना पद सम्भालते ही शुरू कर दी थी। भाषा के आधार पर देश को बाँटा गया। हिन्दी को राष्ट्रभाषा तो घोषित करवा दिया लेकिन सभी प्रान्तों को छूट भी दे दी कि जब तक चाहें सरकारी काम काज अंग्रेज़ी में करते रहें। शिक्षा माध्यम प्रान्तों की मन मर्जी पर छोड़ दिया गया। फलस्वरूप कई प्रान्तों ने हिन्दी को नकार कर केवल प्रान्तीय भाषा और अंग्रेज़ी भाषा को ही प्रोत्साहन दिया और हिन्दी आज उर्दू भाषा से भी पीछे खड़ी है। भारत इतिहास के  स्वर्ण-युग को पंडित नेहरू ने “गोबर युग” कह कर नकार दिया था। आज़ादी के बाद देश में काँग्रेस बनाम नेहरू परिवार का ही शासन रहा है, इस लिये जवाहरलाल नेहरू की उपलब्धियों का सही आंकलन नहीं किया गया। आने वाली पीढीयां जब भी उन की करतूतों का मूल्यांकन करें गी तो उन की तुलना तुग़लक वंश के सर्वाधिक पढे-लिखे सुलतान मुहम्मद बिन तुग़लक से अवश्य करें गी और तभी भारत के इतिहास में नेहरू जी को उनका यत्थेष्ट स्थान प्राप्त होगा।  भारत के युवाओं की विचारधारा परिवारवाद के बारे में बदले गी। देश में ऐकता, सुरक्षा, स्वालम्बन और आत्म-विशवास की लहर जोर पकडे गी।

भारत जागृतिकी शुरूआत हो चुकी है। पवित्र गंगा को अब कोई ‘रिवर गेंजिज़’नहीं कहै गा गंगा माता ही कहैं गे और उस की पवित्रता को बहाल करें गे। काशमीरी शरणार्थी सुरक्षा और इज्जत के साथ अपने घरों में लौट कर नया जीवन आरम्भ करें गे। संसद भवन हमारे शासन तन्त्र में पवित्र मन्दिर की तरह पवित्र स्थल है। राष्ट्र के शहीदों को ही भारत रत्न का सम्मान प्राप्त होगा। परिवारिक शासकों के किले धवस्त हो चुके हैं और जो इक्का-दुक्का बचे हैं उन की बुनियादें भी हिल चुकी हैं। देश के भण्डारों को किस प्रकार लूटा गया है इस की जवाबदेही भी निशचित होगी।

आज जनता में संवैधिनिक संस्थानों  के प्रति आदर और उत्साह है। देश की जनता अपने आप नरेन्द्र मोदी की विजय को अपनी विजय की तरह मना रही है। यही लक्षण हैं कि अब अच्छे दिन शुरू हो चुके हैं। सभी की मेहनत रंग लाई है। सभी भारतवासियों के लिये इस शुभ घडी पर हार्दिक मुबारकबाद।

चाँद शर्मा

 

 

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