हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में


डालर और रुपये की कीमत के अनुपात से अमेरिका भारत से 60 गुणा अमीर देश है। मगर अमेरिका अपने देश की नागरिक्ता उन्हीं लोगों को प्रदान करता है जो आर्थिक तौर पर अपना खर्चा उठा सकें या कोई दूसरा समृद्ध अमेरिकन नागरिक उन का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ले। इस के अतिरिक्त जन्म से लेकर प्रार्थना पत्र देने की तारीख तक आवेदक का पूरा रेकार्ड प्रमाणित रूप में चैक किया जाता है। आवेदक के लिये जरूरी है कि वह अंग्रेज़ी लिखने पढने में कुशल हो। लिखित टेस्ट से निश्चित किया जाता है कि आवेदक को अमेरिका की जंगे-आजादी का इतिहास, संविधान, प्रशासनिक ढांचे तथा अमेरिका की आस्थाओं की पूरी जानकारी है। सब से छान बीन हो जाने के बाद आवेदक को अमेरिका के प्रति पूर्णत्या समर्पित होने की शप्थ और अपने पिछले देश से सभी भावनात्मिक और संवैधानिक सम्बन्धों का त्याग करना अनिवार्य होता है। तब जा कर वह नागरिक बनता है लेकिन उसे अपने जीने के लिये सभी सुविधायें अपनी आय से खरीदनी पडती हैं। मुफ्त में कुछ नहीं मिलता।

अमेरिका की तुलना में आज भारत में चारों तरफ से मुफ्तखोर बंगलादेशी, पाकिस्तानी आतंकी, माओवादी, क्रिकेट या ग़जल-प्रेमी, ड्रगपैडलर-विदेशी नेताओं के भ्रष्टाचार के कारण घुसे चले आ रहै हैं। चेकिंग तो दूर, मूर्खता-वश हमारी सरकारें बाहरी लोगों को देश में आने के बाद अनुमति (विजा) प्रदान कर अपनी पीठ थपथपाने लगती हैं। विज़ा अवद्धि समाप्त हो जाने के बाद भी बहुत सारे विदेशी वापिस ही नहीं जाते और इधर-उघर छिप जाते हैं। अगर घुस-पैठिये पकडे भी जायें तो उन को प्रशासनिक अधिकारी वापिस नहीं भेज सकते क्यों कि कई धर्म-निर्पेक्ष और देश-द्रोही भारतीय नेता और मीडिया उन के समर्थन में खडे हो जाते हैं और मामला ठंडे बस्ते में पहुंच जाता है। यही देश द्रोही नेता अपने लिये वोट बैंक खडा करने के लिये उन भिखमंगों को पहचान-पत्र, राशन-कार्ड और कई तरह की सरकारी सुविधाओं के योग्य बनवा देते हैं जिस का आर्थिक बोझ आम नागरिकों पर सदा के लिये पड जाता है। देश को दीमक खाने लग जाती है।

बाहर से लाये गये यह अनपढ, बीमार और निकम्मे लोग और उन के परिवार बडे बडे शहरों में झोंपडिया बना कर सरकारी जमीन पर कबजा कर लेते हैं। हमारी नदियों के जल को दूषित करते हैं। जहां चाहें सडकों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों को शौचालय बना डालते हैं। हमारे सरकारी अस्पताल इन्हीं लोगों से भरे रहते हैं। ऊपर से यही लोग हमारे देश में वोटर बन कर हमारे मूल-नागरिकों के लिये भ्रष्ट सरकारों को चुनते हैं। यह सिलसिला चलता रहता है। क्या इन कीडों से भारत कभी छुटकारा पा सके गा? निराशजनक तो कहैं गे ‘नहीं’ – लेकिन अगर आप में कछ आत्म विशवास और स्वाभिमान है तो ‘अवश्य।’

अब जरा सोचियेः-

  • अगर जम्मु-कशमीर की कोई लडकी भारत के किसी व्यक्ति से शादी कर ले तो क्यों वह जम्मू-कशमीर में भी अपनी सम्पति तथा वोट देने का अधिकार खो बैठती है जबकि वही लडकी अगर किसी पाकिस्तानी कशमीरी से शादी कर ले तो अपने साथ उस ‘भारत-शत्रु’ को भी भारत की नागरिकता दिलवा सकती है। इस तरह की घातक धारा 370 क्यों समाप्त नहीं होनी चाहिये?
  • आम तौर पर भारत से मुस्लिम लडकियां पाकिस्तानी युवकों से विवाह कर के अपने ससुराल पाकिस्तान नहीं जातीं। उल्टे विवाह के बाद उस का पाकिस्तानी पति भारत का नागरिक क्यों बन जाता है और हमारी बढी हुय़ी जनसंख्या को 10 -12 बच्चों का योग्दान कर देता है। कई पाकिस्तानी-पति तो बच्चों के साथ अपनी पत्नी को तलाक दे कर वापिस पाकिस्तान चले जाते हैं और वहां और निकाह कर लेते हैं। भारतीय मुस्लिम युवा निकाह कर के अपनी ऐक से ज्यादा पत्नियों को को भारत में ही बसा देते हैं ताकि यहां की जनसंख्या बराबर बढती रहै। ऐसा क्यों हो रहा है ? क्या हमारे पास जन-संख्या की कमी है?
  • हम चारों तरफ से आतंकी मुस्लिम देशों से घिरे हुये हैं। फिर किन कारणों से हमारे देश के सभी सीमावर्ती राज्यों में बार्डर के साथ लगने वाली लगभग सारी जमीन मुस्लिमों के हाथ बिक चुकी है? देश की लग भग सभी तटीय क्षेत्रों की जमीन भी मुस्लिमों की मलकीयत क्यों बनती जा रही है? क्या यह देश के सुरक्षा के लिये आने वाला खतरा नहीं है? सीमा और तटों के 10 किलोमीटर अन्तर्गत आने वाली जमीन को हम रक्षा-मंत्रालय को क्यों नहीं सौंप देते ताकि हमारी सीमायें सुरक्षित रहैं और वहां आने जाने पर पूरा नियन्त्रण रक्षा बलों का ही रहै? यह भी जानना चाहिये कि इस बिक्री में विदेशी धन तो नहीं लग रहा।
  • अनजान बन कर हम इस तरह से अपने देश को क्यों बर्बाद करते जा रहै हैं? क्या देश से ज्यादा हम अपनी झूठी धर्म-निर्पेक्षता और मानवाधिकारों को प्रेम करने लग चुके हैं? क्यों हमारे युवाओं के पास देश के बारे में सोचने की आदत ही नहीं रही? जिन लोगों ने हम से नफरत कर के देश का बटवारा करवाया उन्हीं को संतुष्ट रखने के लिये आज फिर से भारत के नागरिक अपने देश के ज्ञान-ग्रंथों और परम्पराओं को त्यागते क्यों चले जा रहै हैं ?
  • किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिये कि पाकिस्तान का जन्म भारत की शत्रुता के कारण ही हुआ है और रिशता हमें निभाना ही पडे गा। क्या हम अपने देश के नागरिकों पर यह पाबन्दी नहीं लगा सकते कि अगर वह किसी विदेशी से खास तौर पर अपने निकटतम शत्रु-देश पाकिस्तान से विवाह करें गे तो उन की भारतीय नागरिक्ता समाप्त कर दी जाये गी और विवाहित-विदेशी को भारत में अस्थाई तौर पर भी नहीं आने दिया जाये गा ?
  • किसी को भी भारत की नागरिकता प्रदान करने से पहले क्यों हम आवेदक से कुछ शर्तें नहीं मनवाते कि वह भारत की राष्ट्र भाषा सीखे, भारत की संस्क़ृति के साथ समान आचार संहिता को अपनाये, भारत का मूल निवासी होने के नाते अपने आप को हिन्दूओं का वंशज कहै और वन्देमात्रम कहने से परहेज ना करे। अगर उसे यह सब पसंद नहीं तो कहीं और जा कर रहै। क्या हमारे पास जन-संख्या की कमी है? क्यों हम अपने देश के हितों की रक्षा अमेरिका की तरह से नहीं कर सकते?

हमें अपने मन, वचन और कर्म से पूरे विश्व को संदेश देना होगा कि भारत कोई सार्वजनिक अन्तर्राष्ट्रीय सराय स्थल नहीं कि कोई भी यहां आकर अपना बिस्तर लगाले और हम उस की चाकरी में जुट जायें। हमें सडी गली काँग्रेसी धर्म-निर्पेक्षता को त्याग कर स्वाभिमान से कट्टर हिन्दूराष्ट्र वाद को अपनाना होगा नहीं तो हम सभी बेघर हो जायें गे और हमारे लिये विश्व में कोई दरवाजा नहीं खोले गा। हम सभी हिन्दू हैं, भारत हमारा घर और हमारी पहचान है। हम इसे मिटने नहीं दें गे।

चाँद शर्मा

 

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

टैग का बादल