हिन्दू धर्म वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष में

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हिन्दू महा सागर – एक परिचय


हमें अपने पूर्वजों के धर्म, संस्कृति और इतिहास को जानना चाहिये। हिन्दू धर्म सभी धर्मों में सरल है किन्तु इस का वास्तविक रूप जानने वालों की संख्या बहुत कम है। हिन्दू धर्म के बारे में अधिकतर लोगों की जानकारी उन नेत्रहीनों के बराबर है जो हाथी के किसी ऐक अंग को छू कर ही हाथी के बारे में विवादस्पद विचार व्यक्त कर के आपस में लड़ने लगे थे।

विदेशी शासकों के राज्यकीय संरक्षण से वंचित हो जाने के कारण हिन्दू धर्म भारत में ही अपंग एवं त्रिसकरित हो गया था। हिन्दू धर्म में व्यक्तिगत विचारों, धार्मिक ग्रंथों तथा उन की मीमांसाओं की भरमार है। इस कारण एक ओर तो हिन्दू धर्म तर्क संगत विचारों के कारण सुदृढ होता रहा है तो दूसरी ओर विचारों की भरमार तथा विषमताओं के कारण भ्रम भी धर्म के साथ जुड़ते रहे हैं।

आज का युवा वर्ग हिन्दू धर्म को केवल उन रीति रिवाजों के साथ जोड कर देखता है जो साधारणत्या विवाह या मरणोपरांत करवाये जाते हैं। विदेशी पर्यटक भिखारियों, नशाग्रस्त, बिन्दास साधुओं की तसवीरें विदेशी पत्रिकाओं में छाप कर हिन्दू धर्म की विशाल छवि को धूमिल कर रहे हैं ताकि वह युवाओं को विमुख कर के उन का धर्म परिवर्तन कर सकें। लार्ड मैकाले और भारत सरकार की धर्म निर्पेक्षता की शिक्षा पद्धति से सर्जित किये गये अंग्रेज़ी पत्र-पत्रिकाओं के लेखक दिन रात हिन्दू धर्म की छवि पर कालिख पोतने में लगे हुये हैं। उन के विचारों में जो कुछ भी हिन्दू धर्म या हिन्दू संस्कृति से जुड़ा हुआ है वह अन्धविशवास, दकियानूसी, जहालत तथा हिन्दू फंडामेंटलिज़म है। वह यही साबित करने में जुटे रहते हैं कि भारत केवल सपेरों, लुटेरों अशिक्षतों तथा भुखमरों का ही देश है।

हिन्दू युवा वर्ग कई कारणों से निजि भविष्य को सुरक्षित करने में ही जुटा रहता है तथा अपने पूर्वजों के धर्म का बचाव करने में लगभग असमर्थ है। युवाओं ने धर्म निर्पेक्षता की आड़ में पलायनवाद तथा नासतिक्ता का आश्रय ढूंड लिया है जिस के फलस्वरूप राजनैतिक उद्देष से प्रेरित विदेशियों को हिन्दू धर्म को बदनाम कर के भारत को अहिन्दू देश बनाने का बहाना मिल गया है। यदि ऐसा ही चलता गया तो शीघ्र ही हिन्दू अपने ही देश में बेघर हो जायें गे और बंजारों की तरह विदेशों में त्रिसकरित होते फिरें गे।

इस अंधकारमय वातावरण में आशा की किरण भी अभी है। इन्टरनेट पर बहुत सी वेबसाईटस हिन्दू धर्म के बारे में मौलिक जानकारी देनें में सक्षम हैं। विदेशों में रहने वाले हिन्दू जागृत हो रहे हैं। वह अपने धर्म और संस्कृति से पुनः जुड़ कर सुसंस्कृत, सुशिक्षित, समृध तथा सफल हो रहे हैं – उसे त्याग कर नहीं।

हिन्दू महा सागर लेख श्रंखला पहले अंग्रेजी में Splashes from Hindu Mahasagar के शीर्षक से लिखी गयी थी। विदेशों में लोकप्रियता प्राप्त करने के पश्चात इस का हिन्दी अनुवाद भी दिल्ली से सप्ताहवार छपता रहा है और अब फेसबुक के माध्यम से ऐक अलग ब्लाग पर प्रस्तुत किया जा रहा है। इस लेख श्रंखला का अभिप्राय हिन्दू धर्म का प्रचार या हिन्दू इतिहास को दोहराना नहीं है अपितु हिन्दू धर्म के महा सागर की विशालता की कुछ झलकियों को आज के संदर्भ में दर्शाना मात्र है ताकि हम अपने पूर्वजों के कृत्यों को समर्ण कर के गर्व से कह सकें कि हम हिन्दू है। अंग्रेजी में यह लेख माला apnisoch.worldpress.com बलाग पर प्रस्तुत है।

72 लेखों की श्रंखला में चर्चित विषय सामान्य हैं किन्तु बहुत कुछ हिन्दू महा सागर के तल में छिपा है – उस को पाने के लिये सागर की गहराई में उतरना हो गा। समस्त सागर को जानना भी कठिन है। अतः जिज्ञासु अवश्य ही गहराई में उतरें गे तो कुछ केवल महासागर की विशालता को ही आनन्द से निहारें गे और कुछ बिन्दास या विरोधी केवल रेत उछालते हुये चले भी जायें गे।

आप के स्कारात्मिक सुझावों तथा आलोचनाओं का स्वागत है जिन का कमेन्ट्स के माध्यम से उत्तर देने की भरपूर यत्न किया जाये गा। अगर आप को तर्क संगत लगे तो इसे अपने मित्रों – और युवाओं के साथ बाँटें। इस से हिन्दू धर्म और समाज को संगठन शक्ति मिलेगी।

मुझे इस बात का संतोष अवश्य है कि हिन्दू महासागर पर लागइन करने वालों की संख्या ऐक लाख से ऊपर हो चुकी है और आज देश में ऐक राष्ट्रीय सरकार है जिस पर उम्मीद लगाई जा सकती है कि वह हिन्दू मर्यादाओं की रक्षा करे गी। 03.04.2015

चाँद शर्मा

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